:
Breaking News

Bhagalpur News: 281 से ज्यादा चुनाव लड़ने वाले ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया का निधन, 96 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | भागलपुर के चर्चित ‘धरती पकड़’ नागरमल बाजोरिया का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने पंचायत से राष्ट्रपति चुनाव तक 281 से अधिक चुनाव लड़े।

भागलपुर, 3 सितंबर। Alam Ki Khabar। चुनावी राजनीति में हार-जीत से कहीं आगे अपनी अलग पहचान बनाने वाले भागलपुर के नागरमल बाजोरिया उर्फ ‘धरती पकड़’ अब नहीं रहे। 96 वर्ष की उम्र में पटना में उनका निधन हो गया। लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य परेशानियों से जूझ रहे नागरमल बाजोरिया ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा चुनावी मैदान में बिताया। उनके नाम की सबसे बड़ी पहचान यही रही कि उन्होंने चुनाव को केवल जीतने की कोशिश के तौर पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी के रूप में देखा।

नागरमल बाजोरिया के चुनावी सफर का आंकड़ा अपने आप में असाधारण रहा। उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड और रिपोर्टों के अनुसार वह 281 से अधिक चुनाव लड़ चुके थे। उनके चुनावी मुकाबले पंचायत और स्थानीय निकाय स्तर से लेकर विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और राष्ट्रपति पद तक पहुंचे। 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में उनके 281 चुनाव लड़ने का उल्लेख किया गया था। चुनाव आयोग के पुराने आंकड़ों में भी अलग-अलग चुनावों में उनका नाम दर्ज मिलता है।

जीत नहीं मिली, लेकिन पहचान देशभर में बनी

नागरमल बाजोरिया के चुनावी जीवन की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इतने लंबे सफर में उन्हें चुनावी जीत नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने चुनाव मैदान से दूरी नहीं बनाई। एक चुनाव हारने के बाद अगली बार फिर नामांकन दाखिल करना उनकी पहचान बन चुका था।

उनके लिए चुनाव केवल सत्ता तक पहुंचने का माध्यम नहीं था। वह इसे लोकतंत्र में आम नागरिक की भागीदारी के तौर पर देखते थे। यही सोच उन्हें लगातार चुनाव लड़ने की प्रेरणा देती रही।

उनके चुनावी सफर ने उन्हें भागलपुर से बाहर भी पहचान दिलाई। देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर उन्होंने चुनाव लड़ा और कई बार ऐसे प्रत्याशियों के सामने खड़े हुए जिनका राजनीतिक कद उनसे कई गुना बड़ा था।

इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के खिलाफ भी मैदान में उतरे

नागरमल बाजोरिया के राजनीतिक सफर के सबसे चर्चित अध्यायों में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ना शामिल रहा।

उन्होंने रायबरेली में इंदिरा गांधी के खिलाफ और अमेठी में राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरकर देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। उस दौर में इन सीटों की राष्ट्रीय राजनीति में बेहद अहम भूमिका थी। ऐसे में एक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उनका मुकाबले में उतरना अपने आप में चर्चा का विषय बनता था।

2012 में उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए भी नामांकन दाखिल किया था। उस समय प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार थे। हालांकि नागरमल बाजोरिया का नामांकन आगे चुनावी मुकाबले में नहीं पहुंच सका। राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े उस दौर के रिकॉर्ड में उनका नाम नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों में आया था।

281 चुनाव और लोकतंत्र के प्रति अलग नजरिया

नागरमल बाजोरिया की कहानी को सिर्फ ‘लगातार हारने वाले प्रत्याशी’ के तौर पर देखना उनके पूरे व्यक्तित्व को छोटा कर देगा। उनकी पहचान इस बात से बनी कि वह लोकतंत्र में अपनी भागीदारी को लेकर लगातार प्रतिबद्ध रहे।

2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 281 चुनाव लड़े थे और नामांकन दाखिल करने की संख्या 284 तक पहुंची थी। इनमें कुछ नामांकन खारिज भी हुए थे। यानी चुनाव लड़ने का उनका सिलसिला सिर्फ एक दशक या दो दशक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई दशकों तक चलता रहा।

पुराने चुनावी रिकॉर्ड में भी नागरमल बाजोरिया का नाम मिलता है। 1971 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार उस चुनाव में उन्हें 6,898 वोट मिले थे। 1989 में भी भागलपुर लोकसभा सीट से उनका नाम निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दर्ज है।

2004 के चुनावी रिकॉर्ड में भी उनके नाम के साथ ‘Dhartipakar’ दर्ज है।

‘धरती पकड़’ नाम के पीछे जनसेवा की कहानी

नागरमल बाजोरिया की पहचान सिर्फ चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं थी। भागलपुर में पेयजल की समस्या के दौरान उनके द्वारा निजी स्तर पर लोगों की मदद करने की चर्चा भी होती रही।

बताया जाता है कि शहर के कई हिस्सों में पानी की परेशानी को देखते हुए उन्होंने अपने खर्च से चापाकल लगवाए। जमीन के भीतर से पानी निकालने और लोगों तक पहुंचाने के इस प्रयास से उनके साथ ‘धरती पकड़’ नाम जुड़ गया।

बाद में यही उपनाम उनकी चुनावी पहचान का हिस्सा बन गया। चुनावी पोस्टर और नामांकन के दौरान भी वह ‘धरती पकड़’ के नाम से जाने जाने लगे।

चुनाव उनके लिए एक मिशन था

आज के दौर में चुनाव का मतलब आमतौर पर राजनीतिक दल, प्रचार, संसाधन और जीत की रणनीति से जोड़ा जाता है। नागरमल बाजोरिया का तरीका इससे बिल्कुल अलग था।

वह सीमित संसाधनों के बावजूद चुनाव मैदान में उतरते थे। कई बार उनके सामने बड़े राजनीतिक दलों के मजबूत प्रत्याशी होते थे। परिणाम पहले से लगभग स्पष्ट दिखाई देता था, फिर भी वह नामांकन दाखिल करने से पीछे नहीं हटते थे।

यही वजह थी कि समय के साथ उनका नाम चुनावी राजनीति के ऐसे चेहरे के तौर पर स्थापित हो गया, जिनके लिए चुनाव जीतना अंतिम लक्ष्य नहीं था।

भागलपुर से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का चुनावी सफर

नागरमल बाजोरिया ने अपने जीवन में चुनाव की लगभग हर बड़ी श्रेणी को छुआ। स्थानीय स्तर के चुनावों से शुरू होकर उनका सफर विधानसभा और लोकसभा तक गया। विधान परिषद और राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने अपनी दावेदारी पेश की।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए उनका नामांकन दाखिल करना विशेष रूप से चर्चित हुआ। 2012 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से कई उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था और नागरमल बाजोरिया भी उनमें शामिल थे।

यह उनके चुनावी जुनून की चरम तस्वीर थी—जिस व्यक्ति ने स्थानीय चुनावों में भी अपनी दावेदारी पेश की, वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के चुनाव तक पहुंच गया।

अब शुक्रवार को होगी अंतिम विदाई

नागरमल बाजोरिया का पार्थिव शरीर पटना से भागलपुर स्थित उनके एमपी द्विवेदी रोड आवास लाया जा रहा है। परिवार के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे उनके निवास से अंतिम यात्रा निकलेगी।

इसके बाद बरारी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

उनके निधन की खबर से परिवार के साथ-साथ उनके परिचितों, शुभचिंतकों और भागलपुर के व्यावसायिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक का माहौल है।

पीछे छोड़ गए चुनावी किस्सों की लंबी विरासत

नागरमल बाजोरिया की राजनीतिक विरासत किसी चुनावी जीत, मंत्री पद या सत्ता की कुर्सी से नहीं मापी जाएगी। उनकी पहचान उस जिद से बनी जिसने उन्हें बार-बार चुनावी मैदान में पहुंचाया।

एक तरफ बड़े राजनीतिक दलों की पूरी मशीनरी चुनाव जीतने के लिए काम करती थी, दूसरी तरफ नागरमल बाजोरिया सीमित साधनों के साथ अपना नामांकन दाखिल करते थे। परिणाम उनके पक्ष में कभी नहीं आया, लेकिन उनकी मौजूदगी चुनावी प्रक्रिया में हमेशा एक अलग कहानी लिखती रही।

भागलपुर ने उन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से पहचाना और देश की चुनावी राजनीति ने उन्हें एक ऐसे प्रत्याशी के रूप में याद रखा, जिसने हार को अपने उत्साह पर हावी नहीं होने दिया।

नागरमल बाजोरिया अब चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे। लेकिन उनके 281 से अधिक चुनावों का सफर, बड़े नेताओं के खिलाफ उनकी दावेदारी और लोकतंत्र में भागीदारी को लेकर उनका जुनून लंबे समय तक राजनीतिक चर्चाओं और भागलपुर की स्मृतियों में बना रहेगा।

यह भी पढ़ें

बिहार की चुनावी राजनीति में निर्दलीय उम्मीदवारों की बदलती भूमिका

भागलपुर में राजनीति के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े चर्चित चेहरे

हार के बावजूद इतिहास में दर्ज हुआ एक नाम

नागरमल बाजोरिया की जिंदगी लोकतंत्र की उस तस्वीर को सामने लाती है जिसमें चुनाव का अर्थ केवल जीतना नहीं होता। लोकतांत्रिक व्यवस्था हर नागरिक को चुनाव लड़ने और अपनी बात जनता तक पहुंचाने का अधिकार देती है। उन्होंने इसी अधिकार को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया।

उनके लगातार चुनाव लड़ने पर कोई सवाल उठा सकता है कि जब जीत नहीं मिली तो फिर बार-बार मैदान में उतरने का मतलब क्या था? लेकिन उनकी कहानी का जवाब शायद यही है कि लोकतंत्र में भागीदारी का महत्व परिणाम से हमेशा तय नहीं होता।

उन्होंने बड़े राजनीतिक नामों के सामने अपनी दावेदारी पेश की। कई बार उनकी जमानत तक जब्त हुई होगी, कई नामांकन खारिज हुए होंगे, लेकिन उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को छोड़ने के बजाय अगली संभावना तलाशने का रास्ता चुना।

आज जब चुनाव बेहद महंगे और संसाधन आधारित होते जा रहे हैं, तब नागरमल बाजोरिया का चुनावी सफर एक अलग तरह का उदाहरण छोड़ जाता है। उनके पास बड़े दल का संगठन नहीं था, बड़ी चुनावी मशीनरी नहीं थी और जीत की गारंटी भी नहीं थी। फिर भी उनका विश्वास उन्हें बार-बार मतदान केंद्रों तक ले जाने वाले चुनावी मैदान में खड़ा करता रहा।

उनका निधन केवल एक बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि बिहार की चुनावी संस्कृति के एक अनोखे अध्याय का अंत भी है। भागलपुर के ‘धरती पकड़’ ने भले ही कोई चुनाव नहीं जीता, लेकिन उन्होंने ऐसा चुनावी रिकॉर्ड और ऐसी पहचान जरूर बनाई जिसे भुलाना आसान नहीं होगा।

उनकी सबसे बड़ी विरासत शायद यही रहेगी कि लोकतंत्र में अपनी आवाज दर्ज कराने के लिए जीत का इंतजार जरूरी नहीं—कभी-कभी लगातार भागीदारी ही व्यक्ति को इतिहास में जगह दिला देती है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *